बक्सर | DB Nation News
उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे बिहार के प्रवेश द्वार बक्सर में 10 जून से लागू किए गए इंटर स्टेट ट्रांजिट पास (ISTP) नियम को लेकर परिवहन व्यवसायियों, वाहन मालिकों और चालकों के बीच चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। बिहार सरकार ने दूसरे राज्यों से आने वाले बालू, गिट्टी, पत्थर सहित लघु खनिजों से लदे वाहनों के लिए ISTP को अनिवार्य कर दिया है।
सरकार का दावा है कि इस नई व्यवस्था का उद्देश्य खनिज परिवहन में पारदर्शिता लाना, राजस्व की निगरानी को मजबूत करना तथा अवैध खनन एवं अवैध परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है। लेकिन दूसरी ओर ट्रांसपोर्टरों और वाहन मालिकों का एक वर्ग इसे अतिरिक्त आर्थिक बोझ और जटिल प्रक्रिया के रूप में देख रहा है।
परिवहन कारोबारियों का कहना है कि पहले से वैध चालान और आवश्यक दस्तावेज होने के बावजूद अब अलग से ISTP बनवाने और निर्धारित शुल्क जमा करने की बाध्यता से परिवहन लागत में वृद्धि होगी। उनका यह भी कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रतिदिन हजारों वाहनों की आवाजाही होती है, ऐसे में नई व्यवस्था के कारण जांच प्रक्रिया लंबी हो सकती है, जिससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने और समय की बर्बादी की आशंका है।
बक्सर जैसे सीमावर्ती जिले में यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यहां उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच खनिज परिवहन का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में ISTP लागू होने के बाद इसका सीधा असर ट्रांसपोर्ट व्यवसाय और निर्माण कार्यों की लागत पर पड़ सकता है।
हालांकि खान एवं परिवहन विभाग का स्पष्ट कहना है कि ISTP का उद्देश्य किसी प्रकार की अतिरिक्त वसूली नहीं, बल्कि खनिज परिवहन को पूरी तरह पारदर्शी और नियंत्रित बनाना है, ताकि अवैध खनन और राजस्व की क्षति को रोका जा सके।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या नई ISTP व्यवस्था अवैध खनन और अवैध खनिज परिवहन पर प्रभावी रोक लगाने में सफल होगी, या फिर यह ईमानदार ट्रांसपोर्टरों के लिए अतिरिक्त खर्च, देरी और परेशानियों का कारण बनेगी? आने वाले दिनों में इस व्यवस्था के प्रभाव और परिणाम पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।








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