बक्सर, 30 जुलाई। नीट पेपर लीक मामले को लेकर चले छात्र-युवा आंदोलन में गिरफ्तार साथियों की रिहाई को ऐतिहासिक जीत बताते हुए गुरुवार को आइसा और आरवाईए के नेतृत्व में बक्सर में \'संकल्प दिवस\' मनाया गया। इस अवसर पर शहीद पार्क (कवलदह पोखर) से अंबेडकर चौक तक संकल्प मार्च निकाला गया, जिसके बाद सभा आयोजित कर आंदोलन को और मजबूत बनाने का संकल्प लिया गया।
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशनरत आइसा नेत्री नेहा और आरवाईए नेता अजीत कुमार सिंह की डीजीपी से हुई वार्ता के बाद आंदोलन के दौरान गिरफ्तार छात्र-युवाओं की रिहाई संभव हो सकी। उन्होंने इसे छात्र एकता और लोकतांत्रिक संघर्ष की जीत बताते हुए कहा कि शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार अपने वादों से पीछे हट रही है। उनका कहना था कि जब तक सभी आंदोलनकारियों की सुरक्षित घर वापसी नहीं हो जाती और उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। इसी क्रम में बिहार के विभिन्न जिलों में भी संकल्प दिवस के तहत प्रदर्शन आयोजित किए गए।
आंदोलनकारियों ने रखीं प्रमुख मांगें
सभा में आंदोलनकारियों ने अपनी मांगों का चार्टर भी प्रस्तुत किया। इसमें पालीगंज विधायक संदीप सौरभ एवं नगरनौसा के आंदोलनकारियों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने, आंदोलनकारियों के खिलाफ जारी लुकआउट नोटिस रद्द करने, तस्वीरें प्रकाशित किए जाने पर सरकार से माफी मांगने तथा AK-47 से फायरिंग का आदेश देने वाले अधिकारी पर कार्रवाई की मांग की गई। साथ ही पुलिस कार्रवाई में घायल लोगों को मुआवजा देने की भी मांग उठाई गई।
इसके अतिरिक्त बिहार के विश्वविद्यालयों में 300 प्रतिशत फीस वृद्धि वापस लेने, ऑनर्स में 7.5 सीजीपीए की अनिवार्यता समाप्त करने, शिक्षा के बाजारीकरण पर रोक लगाने, निजी विश्वविद्यालय अधिनियम वापस लेने, एनटीए को भंग करने, रिक्त पदों पर बहाली करने तथा डिग्री कॉलेजों को विश्वविद्यालयों से अलग करने वाले प्रस्तावित विधेयक को वापस लेने की मांग की गई।
कार्यक्रम में बक्सर नगर सचिव ओम जी, डुमरांव सचिव धर्मेंद्र यादव, आरवाईए जिला संयोजक राजदेव सिंह, आइसा जिला सचिव अखिलेश ठाकुर, ललन राम, कन्हैया पासवान, अरविंद यादव, रिंकू कुरैशी, महफूज, कुश भगवान, अभय पांडे, पूजा, संध्या, शिवजी राय, ऊषा देवी, शंकर सहित बड़ी संख्या में छात्र-युवा शामिल हुए।
वक्ताओं ने कहा कि यह जीत संघर्ष का अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत है और शिक्षा को बाजार के हवाले करने वाली नीतियों के खिलाफ आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।







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