11 Jun 2026 Patna
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जब दूसरे राज्यों में खुल सकते हैं बंद समपार फाटक, तो इटाढ़ी गुमटी क्यों नहीं?

आरओबी बंद, फाटक बंद और जनता परेशान — आखिर समाधान क्या है?

Admin 07 Jun 2026, 05:58 AM 295 views
जब दूसरे राज्यों में खुल सकते हैं बंद समपार फाटक, तो इटाढ़ी गुमटी क्यों नहीं?

DB Nation News | विशेष रिपोर्ट

इटाढ़ी रेलवे गुमटी आज केवल एक समपार फाटक का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह हजारों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, प्रशासनिक जवाबदेही और जनसुविधा से जुड़ा प्रश्न बन चुका है। जिस रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) के निर्माण के लिए लोगों ने वर्षों तक इंतजार किया, उसके चालू होने के कुछ ही दिनों बाद तकनीकी खामियां सामने आने लगीं। परिणामस्वरूप पुल पर आवागमन रोक दिया गया। लेकिन इसके साथ ही पहले से बंद किया जा चुका रेलवे समपार फाटक भी बंद है। ऐसे में जनता पूछ रही है—जब पुल उपयोग के योग्य नहीं है, तो फाटक क्यों नहीं खोला जा सकता?

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रेलवे का तर्क है कि समपार संख्या-70 को आरओबी चालू होने के बाद स्थायी रूप से बंद कर दिया गया था और इसे पुनः खोलने के लिए उच्चस्तरीय स्वीकृति की आवश्यकता होगी। तकनीकी और सुरक्षा मानकों का हवाला दिया जा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या जनता की परेशानी को देखते हुए कोई अस्थायी व्यवस्था संभव नहीं है?

दूसरे राज्यों के उदाहरण क्या कहते हैं?

देश में ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं जहां परिस्थितियों को देखते हुए रेलवे को अपने निर्णयों में लचीलापन दिखाना पड़ा।

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तमिलनाडु के वानियंबाडी में आरओबी निर्माण कार्य लंबा खिंचने और लोगों की भारी परेशानी के बाद बंद समपार क्रॉसिंग को दोबारा खोला गया। पंजाब के तरनतारन में मरम्मत कार्य समाप्त होने पर बंद रेलवे फाटक को पुनः चालू किया गया। लुधियाना के बद्दोवाल क्षेत्र में जनदबाव के कारण बंद रेलवे क्रॉसिंग को पुनः शुरू करने की मांग को रेलवे प्रशासन के समक्ष गंभीरता से उठाया गया।

ओडिशा के मयूरभंज में लेवल क्रॉसिंग बंद होने के बाद ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया और रेलवे अधिकारियों को वैकल्पिक समाधान पर विचार करना पड़ा। राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में भी निर्माणाधीन आरओबी या आरयूबी के कारण लोगों की असुविधा बढ़ने पर अस्थायी यातायात व्यवस्था बनाई गई।

इन उदाहरणों का अर्थ यह नहीं कि हर बंद फाटक को खोल देना चाहिए, बल्कि यह कि विशेष परिस्थितियों में जनहित को प्राथमिकता देते हुए समाधान खोजे जा सकते हैं।

इटाढ़ी का मामला अलग क्यों है?

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि एक बार समपार फाटक को समाप्त घोषित कर दिया जाए तो उसे पुनः शुरू करना केवल स्थानीय स्तर का निर्णय नहीं होता। इसके लिए सुरक्षा परीक्षण, तकनीकी अनुमति और रेलवे बोर्ड स्तर की स्वीकृति आवश्यक हो सकती है। यही कारण है कि जिला प्रशासन की मांग के बावजूद तत्काल निर्णय नहीं हो पा रहा है।

लेकिन जनता का तर्क भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। जब आरओबी पर आवागमन बंद है, तब फाटक बंद रहने का सीधा असर किसानों, छात्रों, मरीजों, व्यवसायियों और दैनिक यात्रियों पर पड़ रहा है। कई लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। एंबुलेंस और आपातकालीन सेवाओं को भी अतिरिक्त समय लग रहा है।

आखिर समाधान क्या है?

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक आरओबी पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं हो जाता, तब तक रेलवे, जिला प्रशासन और तकनीकी एजेंसियों को मिलकर कोई अंतरिम व्यवस्था तलाशनी चाहिए। यदि सुरक्षा मानकों के अनुरूप संभव हो, तो सीमित अवधि के लिए नियंत्रित तरीके से समपार फाटक खोलने अथवा अन्य वैकल्पिक मार्ग विकसित करने पर विचार किया जा सकता है।

जनता का सवाल

आज इटाढ़ी की जनता किसी नियम को तोड़ने की मांग नहीं कर रही। लोग सिर्फ यह जानना चाहते हैं कि जब देश के अन्य हिस्सों में विशेष परिस्थितियों में समाधान निकाले गए हैं, तो इटाढ़ी के लोगों की परेशानी कम करने के लिए क्या कोई रास्ता नहीं निकाला जा सकता?

फिलहाल आरओबी भी बंद है और गुमटी भी बंद। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या नियमों के बीच जनहित के लिए कोई रास्ता निकलेगा, या हजारों लोग अनिश्चितकाल तक परेशानी झेलते रहेंगे?

नोट : यह रिपोर्ट उपलब्ध सार्वजनिक सूचनाओं, स्थानीय चर्चाओं और विभिन्न राज्यों में समपार क्रॉसिंग से जुड़े मामलों के अध्ययन पर आधारित विश्लेषणात्मक रिपोर्ट है।

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Tags: BIHAR News Bihar

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